धान की मिलिंग में देरी से किसानों, मिलर्स और सरकार को हो रहा नुकसान, तत्काल समाधान करे राज्य सरकार : दिग्विजय सिंह

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Delay in paddy milling is causing losses to farmers, millers, and the government; the state government must find an immediate solution: Digvijaya Singh.

भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश में उपार्जित धान की मिलिंग में हो रही देरी को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने किसानों, राइस मिलर्स तथा राज्य शासन को संभावित आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए उपार्जित धान को शीघ्र मिलर्स को मिलिंग हेतु उपलब्ध कराने के निर्देश देने का आग्रह किया है।

दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को शिकायत कर्ता जिला कांग्रेस कमेटी रीवा (ग्रामीण) के अध्यक्ष इंजी. राजेन्द्र शर्मा का पत्र भी प्रेषित करते हुए लिखा कि श्री शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश में किसानों से लगभग 51.54 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया था। उपार्जन केन्द्रों से धान सीधे मिलर्स को देने के स्थान पर बड़ी मात्रा में धान का भंडारण वेयरहाउस एवं खुले स्थानों पर किया गया।

उन्होंने लिखा कि अब तक लगभग 14.49 लाख मीट्रिक टन धान की ही मिलिंग हो सकी है और लगभग 36.99 लाख मीट्रिक टन धान मिलिंग के लिए शेष बताया गया है। आशंका व्यक्त की गई है कि मिलिंग में और देरी होने से धान की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए आवश्यक चावल की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

श्री शर्मा ने यह भी बताया है कि धान को वेयरहाउस से मिलर्स तक पहुंचाने के लिए पूर्व में शासन द्वारा लगभग 95 रुपये प्रति क्विंटल की दर से परिवहन व्यय वहन किया गया, जिस पर करीब 475 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यदि अब पुनः धान का परिवहन करना पड़ा तो शासन पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है।

दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से कहा है कि किसानों, मिलर्स और शासन के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय का तत्काल निराकरण किया जाए तथा संबंधित अधिकारियों को उपार्जित धान शीघ्र मिलर्स को मिलिंग के लिए उपलब्ध कराने के समुचित निर्देश दिए जाएं।