हरि-हर एक हैं, प्रभु श्रीराम और महादेव को राजनीति में मत बांटिए: शिवराज सिंह चौहान का संदेश

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Hari and Har are one, do not divide Lord Shri Ram and Mahadev in politics: Message of Shivraj Singh Chouhan

  • राहुल गांधी के ‘शिवजी की बारात’ बयान और तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी की राम-शिव पर टिप्पणी के बीच चर्चा में आया पोस्ट; बोले— आस्था जोड़ती है, राजनीति की संकीर्णता तोड़ती है।

भोपाल/नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भगवान श्रीराम और भगवान शिव को लेकर हो रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच सनातन धर्म में दोनों के एकत्व का संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हरि और हर अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही परम तत्व के दो स्वरूप हैं। भगवान विष्णु और भगवान शिव के इसी एकत्व को हरिहर कहा जाता है।

शिवराज सिंह चौहान ने अपने संदेश में कहा कि सनातन धर्म में श्रीराम और महादेव एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर श्रद्धा, प्रेम और भक्ति के प्रतीक हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महादेव स्वयं श्रीराम के आराध्य हैं, तो उनकी भक्ति के नाम पर श्रीराम से दूरी कैसे बनाई जा सकती है? इसी तरह श्रीराम और महादेव की भक्ति को राजनीतिक खांचों में बांटना भी उचित नहीं है।

राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी के बयानों से जुड़ा सियासी संदर्भ

शिवराज का यह संदेश ऐसे समय सामने आया है, जब भगवान श्रीराम और शिवजी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी चर्चा में है। 29 सितंबर 2026 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भगवान श्रीराम के नारे ‘जय श्रीराम’ और ‘हर हर महादेव’ को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा भगवान श्रीराम को राजनीतिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती है। इस बयान पर भाजपा नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए राम और शिव को अलग-अलग खांचों में बांटने का विरोध किया था। 

इसके बाद 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के विपक्षी मार्च को ‘शिवजी की बारात’ बताए जाने के संदर्भ में शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने सवाल उठाया था कि जो लोग पहले भगवान श्रीराम का विरोध करते रहे हैं, वे अब शिवजी की बात क्यों कर रहे हैं। इस बयान पर भी राजनीतिक बहस हुई थी।

‘ईश्वर किसी राजनीतिक दल के नहीं’

शिवराज सिंह चौहान ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि भगवान महादेव किसी राजनीतिक पार्टी के नहीं हैं और न ही भगवान श्रीराम किसी दल की संपत्ति हैं। वे करोड़ों लोगों की आस्था और सनातन संस्कृति के शाश्वत प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि ईश्वर को राजनीति में बांटने वालों को समझना चाहिए कि आस्था लोगों को जोड़ती है, जबकि राजनीति की संकीर्णता समाज में विभाजन पैदा करती है।

अपने संदेश के अंत में शिवराज ने हरि और हर के एकत्व को सनातन सत्य बताते हुए लिखा— ‘हरि में हर हैं, हर में हरि हैं। यही सनातन सत्य है, यही हरिहर का संदेश है।’

उन्होंने ‘जय श्रीराम’ और ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष के साथ अपने संदेश को समाप्त किया।