CM Dr. Mohan is taking full care of the families of deceased teachers and employees, what is he focusing on?
- राज्य सरकार का फोकस छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों पर भी
- सीएम डॉ. यादव के नेतृत्व में कर्मचारी कल्याण शिविर शुरू
- अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों का तुरंत हो रहा निराकरण
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए राज्य के बच्चों की शिक्षा सर्वोपरि है। वे कई बार भगवान श्री कृष्ण का उदाहरण देकर शिक्षा के महत्व को दर्शा भी चुके हैं। इसलिए उन्होंने छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों के विकास पर भी खासा ध्यान दिया है। उन्होंने नई शिक्षा नीति लागू कर इसकी व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किया है। उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार सुशासन की परिकल्पना को धरातल पर साकार करते हुए संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री डॉ. यादव शिक्षा विभाग के दिवंगत शिक्षकों-कर्मचारियों के परिवारों का भी ख्याल रख रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग ने दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। विभाग ने लंबे समय से लंबित अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों के निराकरण में तेजी लाई है। विभाग के इस कदम से पात्र परिवारों को उनके अधिकार समय पर मिलेंगे और लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित होगा। सीएम डॉ. यादव के नेतृत्व में कर्मचारी कल्याण शिविर भी शुरू किए गए हैं। इन शिविरों के माध्यम से शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याएं ऑनलाइन मिल सकेंगी। साथ ही, उनका निराकरण भी जल्दी होगा। शिक्षा विभाग की सुदृढ़ व्यवस्था के चलते अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया गया। दो दिन पहले ही 251 और नियुक्ति आदेश जारी किए गए। इसके साथ ही पिछले 4-5 दिनों में कुल 851 अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। यह पहल दिवंगत शिक्षकों-कर्मचारियों के आश्रित परिवारों को सम्मानजनक जीवन का आधार और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शिक्षा को नई दिशा देने पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, तकनीक आधारित और रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर दिया है। राज्य सरकार स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने, शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के उपयोग को बढ़ाने और शिक्षकों की भूमिका को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। सरकार के प्रयासों में विद्यार्थियों को फ्री किताबें, साइकिल, यूनिफॉर्म, लैपटॉप और स्कूटी जैसी सुविधाएं जी जा रही हैं। सरकार ने सांदीपनि स्कूलों के जरिये आधुनिक सुविधाओं और शिक्षा का बेहतर वातावरण विकसित किया है। शिक्षा विभाग ने प्रवेश से लेकर अन्य प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने के लिए एजुकेशन पोर्टल 3.0 और स्टूडेंट डायरेक्ट्री मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है।
सरकार ने दिए लैपटॉप
शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत 12वीं बोर्ड परीक्षा में 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की राशि दी जाती है। इसी महीने 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खातों में 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में डिजिटल संसाधनों का उपयोग करने में मदद मिलेगी।
उच्च शिक्षा में 55 पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के 55 जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए गए हैं। इन संस्थानों में पारंपरिक विषयों के साथ रोजगारपरक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर जोर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र शुरू करने, विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने और नए पाठ्यक्रमों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की है। इससे विद्यार्थियों को अपने जिले में ही उच्च शिक्षा के अधिक विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास दिखाई देता है।
शिक्षकों की भूमिका पर फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ शिक्षकों को भी महत्वपूर्ण भागीदार माना है। इसी साल जनवरी में राज्य सरकार ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान किया। इस दौरान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरकारी स्कूलों के बेहतर परिणाम और बढ़ते नामांकन में शिक्षकों के योगदान पर अहम चर्चा की। सितंबर में शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के युवा शिक्षकों से सीधे संवाद कर शिक्षा नीति, तकनीक और विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों पर उनके विचार जाने।
शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ डिग्री नहीं, कौशल भी
सरकार की शिक्षा नीति में अब केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रहने के बजाय विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिखाई देता है। स्कूल स्तर पर डिजिटल संसाधनों और प्रोत्साहन योजनाओं से लेकर कॉलेज स्तर पर रोजगारपरक पाठ्यक्रमों तक किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती अर्थव्यवस्था और रोजगार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों के बुनियादी ढांचे, डिजिटल व्यवस्था, विद्यार्थी प्रोत्साहन, शिक्षकों के संवाद और उच्च शिक्षा में रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया है।





























