भूमि सर्वे नंबर 821 को लेकर ग्रामीणों की गुहार, वर्षों से काबिज परिवारों ने एसडीएम से लगाई न्याय की गुहार

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Villagers plead for land survey number 821, families occupying the land for years plead with the SDM for justice.

  • छीमका मौजा की भूमि पर कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड में बटांकन का मामला, आवेदन में 1995 से काबिज होने का दावा

गोहद से आशीष शर्मा की रिपोर्ट

गोहद। मौजा छीमका स्थित भूमि सर्वे क्रमांक 821 को लेकर ग्रामीणों/भूमि पर काबिज परिवारों ने राजस्व अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखते हुए न्याय की गुहार लगाई है। इस संबंध में एसडीएम गोहद को संबोधित एक लिखित आवेदन सामने आया है, जिसमें भूमि के राजस्व रिकॉर्ड, पूर्व में दिए गए आवास पट्टों तथा मौके पर बने मकानों और लंबे समय से किए जा रहे उपयोग का उल्लेख करते हुए मामले की जांच की मांग की गई है।

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि भूमि सर्वे क्रमांक 821, रकबा 0.21.75, मौजा छीमका, तहसील गोहद में स्थित है। आवेदनकर्ता की ओर से कहा गया है कि उक्त भूमि के संबंध में पूर्व में शासन की आवासीय योजना के तहत लोगों को आवास पट्टे दिए गए थे। इसके बाद संबंधित लोगों द्वारा मौके पर मकानों का निर्माण किया गया और वे लंबे समय से वहां निवास करते आ रहे हैं।

1995 से काबिज होने का दावा

आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि कुछ लोग वर्ष 1995 से भूमि पर काबिज होकर आबादी एवं कृषि कार्य करते आ रहे हैं। आवेदकों का कहना है कि लंबे समय से मौके पर स्थिति बनी होने के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में वास्तविक स्थिति के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई है।

आवेदन में बताया गया है कि मामले को लेकर पूर्व में भी तहसील न्यायालय एवं राजस्व अधिकारियों के समक्ष कई बार निवेदन किया गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

नक्शे में बटांकन नहीं होने का आरोप

आवेदन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा भूमि के नक्शे में बटांकन कायम नहीं किए जाने से संबंधित उठाया गया है। आवेदकों का कहना है कि उनके द्वारा संबंधित अधिकारियों से आग्रह किए जाने के बावजूद राजस्व नक्शे में आवश्यक बटांकन की कार्रवाई नहीं हुई।

इस कारण मौके पर वास्तविक स्थिति और राजस्व अभिलेखों के बीच अंतर होने की बात आवेदन में कही गई है।

आवास बनाने वाले परिवारों की चिंता

मामले में सबसे बड़ा सवाल उन परिवारों को लेकर उठ रहा है, जिन्होंने आवेदन के अनुसार पूर्व में मिले आवास पट्टों के आधार पर मौके पर अपने मकान बनाए हैं। यदि भूमि को लेकर कोई राजस्व कार्रवाई होती है तो इन परिवारों की स्थिति क्या होगी, यह भी प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण प्रश्न है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से रहने वाले परिवारों की स्थिति, पुराने दस्तावेज, आवास पट्टे, मौके का कब्जा और राजस्व रिकॉर्ड—इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।

प्रशासन से क्या मांग?

आवेदन के माध्यम से एसडीएम गोहद से मांग की गई है कि सर्वे नंबर 821 की मौके पर जांच कराई जाए, पुराने राजस्व अभिलेख एवं नक्शे का परीक्षण किया जाए तथा पूर्व में जारी आवास पट्टों और लंबे समय से चले आ रहे कब्जे की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए।

साथ ही, यदि राजस्व रिकॉर्ड में बटांकन या अन्य तकनीकी कार्रवाई लंबित है तो नियमानुसार उसका निराकरण करने की मांग की गई है।

जनता की आवाज : सवाल यह है कि वर्षों पुरानी स्थिति का समाधान कब?

यह मामला केवल जमीन के एक सर्वे नंबर तक सीमित नहीं है। इसके साथ उन परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है, जो आवेदन के अनुसार लंबे समय से उक्त भूमि पर निवास अथवा कृषि कार्य कर रहे हैं।

सरकार और प्रशासन यदि रिकॉर्ड को सही मानते हैं तो मौके की स्थिति भी सामने रखी जाए और यदि मौके की स्थिति अलग है तो उसकी वजह भी जनता को बताई जाए।

राजस्व रिकॉर्ड, पुराने पट्टे, नक्शा, कब्जे की स्थिति और मौके पर बने मकानों की जांच एक ही स्थान पर बैठकर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर और दस्तावेजों का मिलान करके होनी चाहिए।

अब देखना यह है कि एसडीएम गोहद और राजस्व विभाग इस आवेदन पर क्या कार्रवाई करते हैं और वर्षों से चली आ रही इस समस्या का समाधान कब तक होता है।