Mohan government’s big step towards welfare, now food grains will be available at one rupee per kg
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु वर्ग के छात्रावासों-आश्रमों के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ, मंत्रि-परिषद ने दी मंजूरी
भोपाल। समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों को राहत देने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को सम्पन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग के छात्रावासों, आश्रमों एवं सामुदायिक कल्याण केन्द्रों में रहने वाले विद्यार्थियों एवं रहवासियों को अब एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई।
प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि सरकार के इस निर्णय से इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों को भोजन के लिए मिलने वाले गेहूं और चावल पर बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। यह व्यवस्था उन्हें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के शासकीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के समान रियायती खाद्यान्न सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
समान सुविधा, समान अवसर की ओर कदम :
खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश में जून 2002 से विभिन्न कल्याणकारी संस्थाओं एवं स्वयंसेवी संगठनों द्वारा संचालित संस्थाओं को बीपीएल दर पर गेहूं एवं चावल उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू है। नवंबर 2014 से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के शासकीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को एक रुपये प्रति किलो की दर से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसी क्रम में अब विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग के छात्रावासों, आश्रमों एवं सामुदायिक कल्याण केन्द्रों के रहवासियों को भी एक रुपये प्रति किलो की दर से खाद्यान्न उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
13 किलो खाद्यान्न पर बड़ी राहत :
वर्तमान व्यवस्था के तहत इन संस्थानों में रहने वाले प्रत्येक रहवासी को प्रतिमाह 12 किलो गेहूं 5 रुपये प्रति किलो और 3 किलो चावल 6.50 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद गेहूं और चावल दोनों एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध होंगे। इससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा तथा छात्रावासों एवं आश्रमों में भोजन की व्यवस्था और अधिक सुगम होगी।
52 लाख रुपये सालाना वहन करेगी सरकार :
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि 01 रुपये प्रति किलो की दर से खाद्यान्न उपलब्ध कराने पर राज्य शासन पर लगभग 52 लाख रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। राज्य सरकार विद्यार्थियों एवं जरूरतमंद वर्गों को राहत देने के उद्देश्य से इस अतिरिक्त वित्तीय भार को स्वयं वहन करेगी।
राजपूत ने बताया कि सरकार का उद्देश्य केवल रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले विद्यार्थियों को बेहतर भोजन व्यवस्था उपलब्ध कराते हुए उनकी शिक्षा और जीवन-यापन से जुड़ी आवश्यकताओं में सहयोग करना भी है। एक रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं एवं चावल उपलब्ध होने से इन संस्थानों की भोजन व्यवस्था पर आने वाला खर्च कम होगा और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचाने की पहल :
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु वर्ग के विद्यार्थियों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को और मजबूत करेगा। रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को बेहतर भोजन व्यवस्था मिल सकेगी और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव भी कम होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय सामाजिक समावेशन, समान अवसर और जरूरतमंद वर्गों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह निर्णय समाज के जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक राहत देने तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।





























