Digvijay’s padyatra with the message of ‘Yato Dharamstato Jai’, targeted at Ram Mandir Trust
- दशहरे पर शुरू होगी दिग्विजय की पदयात्रा, राम मंदिर प्रबंधन और दान राशि पर उठाए सवाल
भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान पद यात्रा’ निकालने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य धर्म के नाम पर हो रहे कथित अधर्म, भ्रष्टाचार और आस्था के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ जनजागरण करना है।
यात्रा की घोषणा करते हुए दिग्विजय सिंह ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, राम मंदिर निर्माण और मंदिर प्रबंधन से जुड़े मामलों में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच में राम मंदिर को चढ़ावे में प्राप्त नकदी, विदेशी मुद्रा तथा सोने-चांदी के आभूषणों की चोरी और हेराफेरी के मामले सामने आए हैं। सिंह के अनुसार, जांच में कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर नकदी और आभूषणों की चोरी स्वीकार की है तथा घटनाएं सीसीटीवी कैमरों में भी दर्ज हुई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई महीनों के सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए गए।
दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि राम मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए ठेकों में कमीशनखोरी हुई। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़े एक पूर्व इंजीनियर ने उनके अनुसार ठेकों में 40 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने का आरोप लगाया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त दान राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनके अनुसार, एसआईटी के समक्ष ऐसे आरोप आए कि दान राशि का उपयोग अन्य गतिविधियों और संपत्ति खरीद में किया गया। उन्होंने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह द्वारा वर्ष 2021 से 2024 के बीच राम मंदिर के आसपास जमीन खरीद-फरोख्त में कथित भ्रष्टाचार के लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जुड़े कुछ कार्य ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को दिए गए और बिना काम के भुगतान किए जाने के आरोप स्थानीय ऑडिट में सामने आए। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे अनेक दस्तावेज, गवाह और सार्वजनिक बयान हैं जो कथित अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं।

अपने बयान में उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान वर्ष 1989 में हुए रामशिला पूजन अभियान का भी उल्लेख किया। सिंह ने दावा किया कि उस अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में धन और चांदी की ईंटें एकत्रित हुई थीं, लेकिन उनका पूरा सार्वजनिक हिसाब कभी सामने नहीं आया। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय प्राप्त धन और सामग्री का लेखा-जोखा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे स्वयं राम मंदिर निर्माण के समर्थक रहे हैं और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भी योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण के लिए हजारों करोड़ रुपये दान दिए हैं तो उनके उपयोग का हिसाब मांगना अनुचित नहीं माना जाना चाहिए।
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन पर भी सवाल उठाते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि कई पारंपरिक धार्मिक संस्थाओं, शंकराचार्यों और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कुछ पक्षों को ट्रस्ट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में आस्था और धर्म के नाम पर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा किसी राजनीतिक दल के खिलाफ अभियान नहीं है, बल्कि धर्म, आस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के पक्ष में जनजागरण का प्रयास है। सिंह ने कहा कि वे उज्जैन में भगवान महाकाल से शक्ति प्राप्त करने की प्रार्थना करेंगे, ओरछा में रामराजा सरकार के दर्शन करेंगे और अयोध्या में रामलला से देश की आस्था की रक्षा तथा दोषियों को दंडित करने की प्रार्थना करेंगे।
उन्होंने सभी वर्गों, पंथों और विचारधाराओं के लोगों से यात्रा में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि यह पदयात्रा ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ के संदेश के साथ निकाली जाएगी।





























