बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत से लेकर जहरीली शराब और दूषित पानी से हुई मौतों तक, हर मामले में जवाबदेही तय करे भाजपा सरकार: जीतू पटवारी

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From the deaths of tribal children in Balaghat to fatalities caused by toxic liquor and contaminated water, the BJP government must fix accountability in every instance: Jitu Patwari.

  • केंद्रीय गृहमंत्री मध्य प्रदेश आ रहे हैं, तो बताएं—बच्चों की मौत, प्रशासनिक अराजकता और प्रदेश पर बढ़ते कर्ज की जिम्मेदारी कौन लेगा?

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, आदिवासी कल्याण और कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। प्रदेश में मासूम बच्चों की मौत, जहरीली शराब से लोगों की जान जाने और दूषित पानी से नागरिकों की मृत्यु जैसी घटनाएं सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इन मामलों में केवल बयान देने के बजाय जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
पटवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बालाघाट दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन आदिवासी परिवारों के दुख-दर्द को समझने का प्रयास था, जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खोया है। तीन महीने से लेकर एक वर्ष, दो वर्ष, पांच वर्ष, 15 वर्ष और 17 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को खोने वाले परिवारों का दर्द पूरे प्रदेश की संवेदना और शासन की जवाबदेही का विषय है। इन परिवारों की पीड़ा को सुनना और उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है।
पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, शिक्षा और रोजगार की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। अलीराजपुर सहित प्रदेश के आदिवासी जिलों में गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के सवाल लगातार उठते रहे हैं। आदिवासी परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, पौष्टिक आहार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी विकास के लिए निर्धारित बजट के उपयोग में पारदर्शिता का अभाव है। सरकार को बताना चाहिए कि आदिवासी कल्याण के लिए आवंटित धनराशि का कितना हिस्सा स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च हुआ तथा कितना पैसा अन्य मदों में व्यय किया गया। यदि आदिवासी विकास की राशि का दुरुपयोग हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
पटवारी ने कहा कि भाजपा को मध्य प्रदेश में अपने लंबे शासनकाल के दौरान आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति का जवाब देना चाहिए। शहरों के विद्यार्थियों की तरह आदिवासी बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षित शिक्षक, पर्याप्त स्कूल और बेहतर संसाधन मिलने चाहिए। किसी बच्चे का भविष्य उसके जन्मस्थान, आर्थिक स्थिति या सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए।
पटवारी ने बालाघाट में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दौरे के दौरान जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की अनुपस्थिति को गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अनुसार, दौरे के संबंध में पूर्व सूचना और मुख्य सचिव से संवाद के बावजूद दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति प्रशासनिक समन्वय तथा स्थापित प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण है। ऐसे दौरे के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक समन्वय को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। यदि अधिकारियों ने अपने दायित्वों का पालन नहीं किया है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को विभिन्न सक्षम मंचों पर उठाएगी। पार्टी की ओर से संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतें प्रस्तुत करने, विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने, आईएएस और आईपीएस एसोसिएशनों के समक्ष विषय उठाने तथा राष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री को लिखित शिकायत भेजने की बात कही गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई की मांग तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर की जाएगी।

पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की ओर से प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज को लेकर सामने आ रही शिकायतें शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की स्थिति पर प्रश्न उठाती हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा की कोर कमेटी की बैठक से संबंधित खबरों में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल द्वारा अधिकारियों के मंत्रियों की बात नहीं सुनने की शिकायत का उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागीय लापरवाही का मुद्दा उठाया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बारे में भी ऐसी खबरें सामने आईं कि अधिकारियों द्वारा उनके फोन का जवाब नहीं दिया जाता। वहीं, मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय से संबंधित खबरों में मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रियों के फोन न उठाने की शिकायत का उल्लेख हुआ।
पटवारी ने सवाल किया कि जब सरकार के भीतर ही मंत्री, मुख्यमंत्री और अधिकारी एक-दूसरे से समन्वय नहीं बना पा रहे हैं, तो आम नागरिक की समस्या का समाधान कैसे होता होगा? प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य जनता की सेवा करना है, न कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संवादहीनता को बढ़ावा देना।

उन्होंने वन मंत्री नागर सिंह चौहान और मंत्री रामनिवास रावत के बीच सार्वजनिक मतभेदों, मंत्री प्रह्लाद पटेल द्वारा एसडीओ की नियुक्ति पर आपत्ति तथा जबलपुर में आईएएस अधिकारी अरविंद शाह को लेकर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की शिकायतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रशासनिक निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार लिए जा रहे हैं या नहीं।
पटवारी ने मंत्री विजय शाह से जुड़े विवाद के संदर्भ में भी सरकार से जवाबदेही की मांग की और कहा कि किसी भी मंत्री को राजनीतिक पद के कारण जांच या कार्रवाई से विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल के 1,024 दिन बीतने और 803 दिन शेष रहने का उल्लेख करते हुए प्रदेश की प्रशासनिक स्थिति पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, सरकार को शेष कार्यकाल में जनता की समस्याओं के समाधान, प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।
पटवारी ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को कर्ज लेने, उसके उपयोग और उससे पैदा होने वाले वित्तीय दायित्वों का पूरा हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक महीने में तीन बार कर्ज लेने और प्रदेश का कुल कर्ज लगभग चार लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचने का मुद्दा उठाया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वर्तमान कर्ज का कितना हिस्सा विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर खर्च हुआ है। कर्ज की वास्तविक स्थिति, ब्याज भुगतान और भविष्य में उसकी अदायगी का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पटवारी ने मुख्यमंत्री के लिए विमान और हेलीकॉप्टर जैसी सुविधाओं पर होने वाले सरकारी खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूलों और पेयजल की व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती हैं, तब सरकार को अपने खर्च की प्राथमिकताओं और जनहित में किए गए निवेश का पारदर्शी हिसाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रति नागरिक लगभग 80 हजार रुपये के कर्ज का आंकड़ा भी पहुंच गया। सरकार को इस गणना का आधार, कुल सार्वजनिक ऋण और राज्य की वर्तमान आबादी के अनुसार इसका सही विवरण सामने रखना चाहिए।
पटवारी ने कहा कि छिंदवाड़ा में दूषित कफ सिरप से बच्चों की मौत, सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों और इंदौर में दूषित पेयजल की घटना ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में वास्तविक मृतक संख्या, दवा की गुणवत्ता, नियामकीय निगरानी, चिकित्सा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और दवा नियामक तंत्र की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में आबकारी विभाग, अवैध शराब की आपूर्ति और निगरानी व्यवस्था की जांच जरूरी है। सरकार को बताना चाहिए कि अवैध शराब की बिक्री कैसे हुई, समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई और पीड़ित परिवारों को क्या सहायता दी गई।

इंदौर में दूषित पेयजल की घटना के संबंध में पटवारी ने नगर प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पेयजल की गुणवत्ता, पाइपलाइन और सीवेज व्यवस्था, शिकायतों पर कार्रवाई तथा प्रभावित परिवारों को राहत देने के विषय में पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
पटवारी ने स्वास्थ्य मंत्री, आबकारी विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को केवल जांच समितियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। जहां भी लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हो, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

जीतू पटवारी ने भोपाल आ रहे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समक्ष छह प्रमुख सवाल रखते हुए कहा कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद मध्य प्रदेश की जनता को इन विषयों पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

  1. मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच संवादहीनता क्यों?
    यदि मंत्रियों की ओर से मुख्यमंत्री के फोन न उठाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो सरकार में समन्वय की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या मुख्यमंत्री इस संबंध में प्रदेश की जनता को जवाब देंगे?
  2. छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत की राजनीतिक जिम्मेदारी कौन लेगा?
    दूषित कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में वास्तविक संख्या, जांच की स्थिति और दवा की आपूर्ति एवं निगरानी में हुई संभावित चूक का पूरा विवरण कब सार्वजनिक किया जाएगा? स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही किसकी है?
  3. सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है?
    अवैध शराब की आपूर्ति और निगरानी में संभावित लापरवाही की जांच कहां तक पहुंची है? आबकारी विभाग की भूमिका की समीक्षा कब होगी और पीड़ित परिवारों को न्याय कैसे मिलेगा?
  4. आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी के लिए कौन जवाबदेह है?
    लंबे भाजपा शासन के बावजूद आदिवासी बच्चों को पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में आ रही समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हुआ? आदिवासी विकास के लिए आवंटित धनराशि का मदवार हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
  5. इंदौर में दूषित पेयजल की घटना के लिए जवाबदेही कैसे तय होगी?
    पेयजल की गुणवत्ता, सीवेज व्यवस्था और नागरिकों की शिकायतों पर कार्रवाई में जहां भी चूक हुई, उसकी जिम्मेदारी किसकी है? प्रभावित परिवारों को राहत और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
  6. प्रदेश पर बढ़ते कर्ज और सरकारी खर्च का हिसाब कहां है?
    सरकार कुल कर्ज, ब्याज भुगतान, नए ऋण और उनके उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं करती? जनता को यह जानने का अधिकार है कि कर्ज से प्राप्त धनराशि किन विकास कार्यों पर खर्च की गई और उससे प्रदेश को क्या लाभ मिला।
    पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश की जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि जवाबदेह शासन चाहिए। बच्चों की मौत, आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं, संदिग्ध जहरीली शराब, दूषित पेयजल और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मामलों में पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संबंधित विभागों की समीक्षा कर जिम्मेदारियों का निर्धारण करना चाहिए। यदि सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित नहीं कर पा रही है और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने के औचित्य पर भी जनता के सामने जवाब देना चाहिए। साथ ही, जिन मंत्रियों या अधिकारियों के विरुद्ध जांच में गंभीर लापरवाही प्रमाणित हो, उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी परिवारों, पीड़ित बच्चों के परिजनों और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे नागरिकों की आवाज उठाती रहेगी। प्रदेश की जनता के जीवन, सम्मान, स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना ही होगा।