“ब्राह्मणों ने कभी राज ही नहीं किया, तो शोषण कैसे किया?” नरोत्तम मिश्रा का सवाल, शिवपुरी में बोले- संस्कृति के वाहक रहे हैं ब्राह्मण

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“If Brahmins never ruled, how did they exploit?” asked Narottam Mishra, who said in Shivpuri that Brahmins have been the bearers of culture.

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ब्राह्मण समाज को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच बड़ा बयान दिया है। शिवपुरी में आयोजित ब्राह्मण समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह में पहुंचे मिश्रा ने उन आरोपों पर सवाल उठाया, जिनमें ब्राह्मणों पर ऐतिहासिक रूप से शोषण करने के आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब ब्राह्मणों ने कभी राज ही नहीं किया, तो फिर उनके द्वारा शोषण किए जाने की बात कैसे कही जा सकती है।

मिश्रा ने ब्राह्मणों को “शासक नहीं, बल्कि संस्कृति का वाहक” बताते हुए कहा कि समाज में ब्राह्मणों की भूमिका को केवल सत्ता के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका यह बयान शिवपुरी में हुए ब्राह्मण समाज के कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान सामने आया।

चारों कालों का हवाला देकर उठाया सवाल

नरोत्तम मिश्रा ने अपने तर्क में सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि इन चारों कालों में ब्राह्मणों ने राज नहीं किया, फिर उन पर शोषण का आरोप किस आधार पर लगाया जाता है। उन्होंने ब्राह्मणों को सत्ता के बजाय धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

हालांकि, इतिहास के अध्ययन में सामाजिक प्रभाव और राजनीतिक सत्ता को अलग-अलग आयामों के रूप में देखा जाता है। ऐतिहासिक अध्ययनों में ब्राह्मणों की धार्मिक भूमिका के साथ-साथ राजाओं के साथ उनके संबंध, पुरोहित की भूमिका और भूमि-अनुदान जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख मिलता है। इसलिए मिश्रा का बयान इस विषय पर जारी व्यापक सामाजिक-ऐतिहासिक बहस का एक पक्ष है।

‘जुगनुओं ने शराब पी ली है…’

कार्यक्रम में नरोत्तम मिश्रा ने अपने चिर-परिचित शायराना अंदाज में भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा—“जुगनुओं ने शराब पी ली है, अब तो सूरज को गालियां देंगे।” उन्होंने इस टिप्पणी के जरिए ब्राह्मण समाज की आलोचना करने वालों पर तंज कसा।

ब्राह्मण समाज को एकजुट रहने की अपील

मिश्रा ने ब्राह्मण समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एकजुटता पर भी जोर दिया। उन्होंने सनाढ्य, भार्गव और कान्यकुब्ज सहित विभिन्न ब्राह्मण वर्गों का उल्लेख करते हुए समाज को आपसी विभाजन से बचने और एकजुट होकर आगे बढ़ने की बात कही।

मंदिरों और जाति प्रमाण पत्र को लेकर भी सवाल

रिपोर्टों के मुताबिक, मिश्रा ने मंदिरों पर कब्जे और समाज को जातियों में बांटने जैसे आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि ब्राह्मणों ने मंदिरों पर कब्जा किया होता, तो भगवान परशुराम के सबसे अधिक मंदिर होने चाहिए थे। उन्होंने जाति प्रमाण पत्र की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए भी सवाल उठाया कि यदि ब्राह्मणों ने समाज को बांटा है, तो लोग जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील क्यों जाते हैं।

भाजपा में ब्राह्मणों की भूमिका पर बोले

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मिश्रा से भाजपा में ब्राह्मण समाज की भूमिका को लेकर भी सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा में ब्राह्मण समाज की भूमिका “सर्वोच्च स्तर” पर है। साथ ही उन्होंने गुना-शिवपुरी क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने से जुड़े कयासों को खारिज किया।

नरोत्तम मिश्रा के इस बयान के बाद एक बार फिर ब्राह्मण समाज की ऐतिहासिक भूमिका, सामाजिक प्रभाव और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस चर्चा में आ गई है। उनके बयान का मुख्य तर्क यह है कि राजनीतिक सत्ता और सामाजिक-धार्मिक प्रभाव को एक ही आधार पर रखकर ब्राह्मणों पर शोषण का आरोप नहीं लगाया जा सकता।