सुप्रीम कोर्ट मे भोपाल की सीलिंग कार्रवाई पर हुई सुनवाई

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Supreme Court hears Bhopal sealing action

  • भोपाल में नगर निगम की सीलिंग की कार्यवाही जारी रहेगी
  • प्रस्तावित भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट को सशर्त मंजूरी,सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी से होगा अंतिम प्रकाशन
  • दिखावटी कार्रवाई नहीं, अवैध निर्माणों पर हो निर्णायक प्रहार – रहवासी
  • दिन में सील, रात में दुकानें खुलने पर रहवासियों की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट नाराज
  • प्रदेश सरकार का आश्वासन सीलिंग में अब कोई हस्तक्षेप नहीं, उच्च स्तरीय समिति वापस ली

भोपाल। भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में जारी अवैध भूउपयोग एवं निर्माण में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति श्री अमानुल्ला एवं श्री महादेवन की डबल बेंच ने सुनवाई के दौरान नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने न्यायालय को बताया कि उन्हें रहवासियों द्वारा लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि भोपाल नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई कई स्थानों पर केवल कागजी और दिखावटी साबित हो रही है दिन में दुकानें बंद रहती हैं और रात में दोबारा खुल जाती हैं। इस पर न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त की।

याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि यह स्थिति बताती है कि केवल सील लगाने की फोटो खिंचवाने से कानून का पालन नहीं होता। यदि सील किए गए परिसर दोबारा खुल रहे हैं तो यह पूरी कार्रवाई और उसकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भोपाल में बड़ी संख्या में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तथा पहले सील किए गए परिसरों की सील हटाए जाने का मुद्दा भी सामने आ चुका है।

भूमाफिया और बड़े अवैध कारोबारियों पर कार्रवाई हो, छोटे व्यापारियों को निशाना न बनाया जाए”- सुप्रीम कोर्ट

लवनिश भाटी ने कहा कि प्रशासन को कार्रवाई के नाम पर छोटे दुकानदारों और रोजी-रोटी चलाने वाले व्यापारियों को परेशान करने के बजाय उन मामलों पर ध्यान देना चाहिए जहां आवासीय भूखंडों का पूर्णतः व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है और स्वीकृत भवन अनुज्ञा, मानचित्र अथवा निर्धारित लैंड यूज़ का स्पष्ट उल्लंघन है।

त्रिपाठी ने कहा “हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है कानून सबके लिए समान हो।जो आवासीय भूखंड स्वीकृत मानचित्र और भवन अनुज्ञा के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, जहां निर्माण और भू-उपयोग दोनों गंभीर रूप से अवैध हैं, वहां नियमानुसार सीलिंग और विध्वंस की कार्रवाई हो। लेकिन छोटे व्यापारियों को केवल संख्या बढ़ाने के लिए कार्रवाई का निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है।निगम की कार्यवाही पक्षपातपूर्ण और भूमाफिया को संरक्षित ”

पटना को न्यायलाय की नसीहत कार्रवाई निष्पक्ष और वास्तविक हो वरना होगी सीबीआई जांच

देश के अन्य शहरों में भी सर्वोच्च न्यायालयों ने प्रशासन को यह संदेश दिया है कि कार्रवाई वास्तविक तथ्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए। पटना से जुड़े मामलों में न्यायालयों ने भी बिना उचित प्रक्रिया के आम नागरिकों की संपत्ति पर कार्रवाई के विरुद्ध सावधानी बरतने और प्रत्येक मामले को उसके तथ्यों के आधार पर देखने पर जोर दिया है।

“भोपाल में भी यही सिद्धांत लागू होना चाहिए। बड़े और पूर्णतः अवैध व्यावसायिक भू-उपयोग को छोड़कर छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई कर आंकड़े बढ़ाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। कार्रवाई का आधार भू-उपयोग, भवन अनुज्ञा और वास्तविक कानूनी स्थिति होनी चाहिए, न कि केवल यह कि कितनी दुकानों पर ताला लगाया गया।”

नया मास्टर प्लान वर्तमान अवैधताओं की ढाल नहीं

पूर्णेन्दु शुक्ला ने कहा कि भोपाल का नया मास्टर प्लान प्रस्तावित किया जा सकता है, लेकिन प्रस्तावित योजना की आड़ में वर्तमान में लागू नियमों, भवन अनुज्ञा और मौजूदा मास्टर प्लान के उल्लंघन को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि मास्टर प्लान 2005 के अंतर्गत वैधानिक प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करना नगर निगम और शासन की जिम्मेदारी है।

कल क्या नियम होंगे, यह आज के अवैध निर्माण को वैध नहीं बना सकता।

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश शासकीय अधिवक्ता के.एन. नटराजन ने उच्च स्तरीय समिति बनाए जाने पर खेद व्यक्त किया और न्यायालय को आश्वासन दिया कि सीलिंग की कार्रवाई में शासन की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा। मध्य प्रदेश की ओर से यह भी बताया गया कि सीलिंग कार्रवाई में अवरोध मानी जा रही उच्च स्तरीय समिति को भंग कर दिया गया 

विवेक त्रिपाठी ने कहा कि अब सरकार के पास किसी प्रकार का बहाना नहीं बचता। यदि समिति भंग हो चुकी है और शासन ने हस्तक्षेप नहीं करने का आश्वासन दिया है, तो नगर निगम को बिना राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के, पारदर्शी और समान रूप से कानून लागू करना चाहिए।

जयपुर की घटना भी प्रशासनिक दबाव पर गंभीर सवाल उठाती है

सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष जयपुर के अधिवक्ता ने उन्हें धमकाने की शिकायत की जिस पर कोर्ट ने सक्त रूख अपनाते हुए तुरंत राजिस्थान डीजीपी को अगली सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया

त्रिपाठी ने कहा न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव या धमकी से जुड़े मामले सामने आना गंभीर विषय है। यदि किसी शासकीय अधिवक्ता द्वारा न्यायालय को धमकी दिए जाने की शिकायत की गई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और संबंधित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

आज की इस महत्वपूर्ण कार्रवाई को ऑनलाइन माध्यम से सुन रहे भोपाल के रहवासियों ने कहा की 

“भोपाल की जनता अब दिखावे की सीलिंग नहीं, वास्तविक कार्रवाई चाहती है। बड़े अवैध व्यावसायिक परिसरों, गलत भू-उपयोग और स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए निर्माणों पर कानून के अनुसार निर्णायक कार्रवाई हो। छोटे व्यापारियों को परेशान करके आंकड़े बढ़ाने की राजनीति बंद हो। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन जमीन पर प्रत्यक्ष दिखाई देना चाहिए

अरेरा कॉलोनी और भोपाल के अन्य आवासीय क्षेत्रों में प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच, मौके का सत्यापन, भवन अनुज्ञा और भू-उपयोग की जांच तथा उल्लंघन पाए जाने पर समान कार्रवाई की जानी चाहिए।