दशहरे पर ‘राम का हरण’ लिखकर घिरे भाजपा विधायक अजय विश्नोई, विवाद के बाद पोस्ट डिलीट

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BJP MLA Ajay Vishnoi faces backlash for writing ‘Abduction of Ram’ on Dussehra; post deleted following controversy

जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के तबादले पर विधायक की चुटकी बनी चर्चा का विषय, कांग्रेस ने उठाए सवाल; पोस्ट हटाने के बाद भी सियासी हलचल

जबलपुर। मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा विधायक अजय विश्नोई की एक सोशल मीडिया टिप्पणी को लेकर नया विवाद सामने आया है। मामला जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के तबादले से जुड़ा है। दशहरे के दिन विधायक ने अधिकारी के स्थानांतरण पर टिप्पणी करते हुए लिखा— ‘दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो गया।’ इस टिप्पणी के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई। कांग्रेस नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया। बाद में विधायक की ओर से पोस्ट हटा दी गई।

तबादले ने दिया टिप्पणी को राजनीतिक रंग

राज्य शासन के प्रशासनिक फेरबदल में जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को भोपाल भेजा गया है। उन्हें भोपाल नगर निगम आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। इसी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने दशहरे और ‘राम’ के संदर्भ को जोड़ते हुए टिप्पणी की।
अहिरवार के नाम में ‘राम’ होने के संदर्भ में की गई इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर अलग-अलग नजरिए से देखा गया। दशहरे के दिन इस्तेमाल किए गए शब्दों ने मामले को सामान्य प्रशासनिक तबादले की चर्चा से आगे बढ़ाकर राजनीतिक बहस का विषय बना दिया।

कांग्रेस ने टिप्पणी पर जताई नाराजगी

विधायक की पोस्ट को लेकर युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने सवाल उठाए। उन्होंने एक प्रशासनिक अधिकारी के तबादले पर प्रतिक्रिया देते समय भगवान श्रीराम का संदर्भ इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई। इसके बाद सोशल मीडिया पर पक्ष-विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई।
इस घटनाक्रम के दौरान लोदी की पोस्ट में भी एक तथ्यात्मक चूक सामने आई। उन्होंने अजय विश्नोई को कांग्रेस विधायक लिख दिया, जबकि विश्नोई भाजपा के वरिष्ठ नेता और पाटन विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं।

पोस्ट हटाई, लेकिन चर्चा नहीं थमी

विवाद बढ़ने के बीच अजय विश्नोई ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी। हालांकि, पोस्ट हटाने के कारण को लेकर उनकी ओर से किसी स्पष्ट स्पष्टीकरण की पुष्टि नहीं हुई है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक नेताओं की सोशल मीडिया टिप्पणियों और उनके शब्दों के चयन को चर्चा में ला दिया है। नगर निगम आयुक्त का तबादला प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था, लेकिन दशहरे के दिन की गई टिप्पणी ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया।

फिलहाल, इस मामले में चर्चा का केंद्र विधायक की टिप्पणी, कांग्रेस की आपत्ति और उसके बाद पोस्ट हटाया जाना है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि राजनीतिक माहौल में सोशल मीडिया पर लिखे गए कुछ शब्द भी किस तरह बड़े विवाद का रूप ले सकते हैं।