विश्वनाथ घाट के निर्माण पर उठे सवाल, 15 फीट ऊंची दीवार से नदी तक पहुंचने का रास्ता बंद
Questions raised over the construction of Vishwanath Ghat, a 15-foot-high wall blocks access to the river.
सीढ़ियों के अभाव में श्रद्धालुओं को परेशानी, निर्माण की गुणवत्ता और व्यवस्था पर भी उठीं आपत्तियां
आशीष शर्मा की कलम से
गोहद। नगर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल बेसली नदी किनारे स्थित विश्वनाथ घाट का निर्माण इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। घाट पर कराए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि जिस घाट पर पहले नदी का जलस्तर सीढ़ियों तक पहुंचता था और श्रद्धालु आसानी से स्नान, पूजन एवं तर्पण कर पाते थे, वहां अब निर्माण के स्वरूप में बदलाव के कारण नदी तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। आरोप है कि निर्माण के दौरान करीब 15 फीट ऊंची दीवार बना दिए जाने से नदी तक पहुंचने का रास्ता बाधित हो गया है।
विश्वनाथ घाट गोहद का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां धार्मिक आयोजनों, पूजन, स्नान और तर्पण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले घाट पर नदी के जलस्तर तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सुविधा थी, लेकिन वर्तमान निर्माण के बाद श्रद्धालुओं को नदी तक जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निर्माण के स्वरूप में बदलाव से बढ़ी परेशानी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विश्वनाथ घाट का निर्माण इस तरह होना चाहिए था कि श्रद्धालुओं को नदी तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। घाट पर सीढ़ियों और सुगम रास्ते की व्यवस्था धार्मिक गतिविधियों के लिए आवश्यक है। लेकिन वर्तमान निर्माण में नदी तक पहुंचने का रास्ता बाधित होने से लोगों को परेशानी हो रही है।
लोगों के मुताबिक, घाट पर पहले नदी का पानी सीढ़ियों तक पहुंचता था, जिससे स्नान और पूजन करना आसान रहता था। अब निर्माण के कारण घाट का स्वरूप बदल गया है। नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण के दौरान नदी तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सीढ़ियां और रास्ता बनाया जाता, तो श्रद्धालुओं को इस समस्या का सामना नहीं करना
घाट पर निर्माण के दौरान करीब 15 फीट ऊंची दीवार बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दीवार और निर्माण की मौजूदा संरचना के कारण नदी तक पहुंचने का रास्ता सुगम नहीं रह गया है। इससे धार्मिक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को कठिनाई हो रही है।
नागरिकों का कहना है कि घाट का निर्माण केवल संरचना खड़ी करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा और नदी तक सुरक्षित पहुंच को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
निर्माण की गुणवत्ता और योजना पर उठे सवाल
विश्वनाथ घाट पर हो रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी नागरिकों ने चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप होना चाहिए और इसकी गुणवत्ता की जांच कराई जानी चाहिए। निर्माण कार्य को लेकर नगर पालिका के अधिकारियों और एसडीओ की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। नागरिकों ने मांग की है कि निर्माण की योजना, तकनीकी स्वीकृति और मौके पर कराए जा रहे कार्य की जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
धार्मिक स्थल होने के कारण विशेष व्यवस्था की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि विश्वनाथ घाट केवल नदी किनारे बना एक निर्माण स्थल नहीं, बल्कि गोहद का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। यहां विभिन्न धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में घाट पर सीढ़ियों, साफ-सफाई और सुरक्षित आवागमन की पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है।
लोगों ने मांग की है कि घाट पर ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे श्रद्धालु आसानी से नदी तक पहुंच सकें और धार्मिक गतिविधियां सुचारु रूप से संपन्न हो सकें।
विश्वनाथ घाट की वर्तमान स्थिति को लेकर नागरिकों ने स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका से निर्माण कार्य की जांच कराने तथा आवश्यक सुधार करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि नदी तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सीढ़ियां बनाई जाएं, रास्ते को सुगम किया जाए और निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए।
इस संबंध में घाट के पुजारी पंडित आनंद शास्त्री, उत्तम नारायण भटेले, राजेश नागर, गौरव गोहद, टोनी अग्रवाल सहित अन्य नागरिकों ने समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उचित व्यवस्था करने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि क्या नगर पालिका और संबंधित अधिकारी विश्वनाथ घाट की समस्याओं का निराकरण कर श्रद्धालुओं को नदी तक पहुंचने की सुविधा उपलब्ध कराएंगे, या फिर धार्मिक स्थल पर निर्माण के बाद भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।





























