CM Dr. Mohan emphasizes Ayurveda; may soon share good news with AYUSH doctors.
भारतीय संस्कृति-जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- 11वां राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस
- पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय-संस्थान में आयोजित हुआ कार्यक्रम
- आयुष चिकित्सकों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर हुई अहम घोषणा
- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ योग और आयुर्वेद को पुनर्प्रतिष्ठित करने का महत्वपूर्ण कार्य
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 सितंबर को पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय-संस्थान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर किया गया था। सीएम डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने फीता काटकर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने आयुष विभाग द्वारा लगाई गई विभिन्न स्टॉल और प्रदर्शनी का अवलोकन किया और आयुर्वेद-आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी भी ली। उन्होंने आयुष चिकित्सकों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर आयुष मंत्री को समुचित निर्देश देने की घोषणा की। सीएम डॉ. यादव ने आयुष विभाग के 185.50 करोड़ रुपए लागत के 25 नए आयुष अस्पताल, औषधालय और महाविद्यालय के भवनों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। इसमें 12 आयुष भवन और डिंडौरी जिले में स्थापित 102 करोड़ रुपए लागत का महाविद्यालय का शुभारंभ भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुष वेलनेस पर्यटन केंद्र के नामों का अनावरण किया। अब ये केंद्र आयुष आरोग्यम धाम के रूप में जाने जाएंगे। साथ ही उन्होंने प. खुशीलाल महाविद्यालय में स्थापित हर्बल गार्डन ऑफ स्टेट इंपोर्टेंस के जन प्रवेश का शुभारंभ भी किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग और आयुर्वेद को पुनर्प्रतिष्ठित करने का महत्वपूर्ण कार्य हुआ है। भारतीय संस्कृति और जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित रहा है। हमारे किचन और भोजन में मसाले भी आयुर्वेद पर आधारित हैं। पारंपरिक रूप से हल्दी के उपयोग से हर कोई परिचित है। भारत ने दुनिया को अष्ट सिद्धि के माध्यम से अपना महत्व बताया है। इन सिद्धियों में शून्य, दशमलव, खलोग, ज्योतिष, वास्तुकला और आध्यात्म भी शामिल है। खलोगशास्त्र की गणना अनुसार आज 23 सितंबर को दिन और रात का समय बराबर है। इसीलिए इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने की पहल की गई है। इसी प्रकार 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के 200 से अधिक देशों में योग दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 21 जून को सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायण में प्रवेश करता है। भारतीय संस्कृति सूर्य आधारित रही है।

हम दुनिया के सुख और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति और वेदों के ज्ञान में सर्वे भवन्तु सुखिन: और वसुधैब कुटुम्बकम की भावना निहित है। हम दुनिया के सुख और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं और पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखते हैं। आयुर्वेद के विशेषज्ञ मानते हैं कि जब किसी इलाके में कोई बीमारी फैलती है तो उसकी औषधि आसपास 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में मौजूद होती है। आयुर्वेद एकमात्र ऐसा इलाज है, जो बीमारी से पहले हमें स्वस्थ रखता है। हम बीमार होने पर ही इलाज क्यों ढूंढें। इसीलिए वेलनेस की संकल्पना रखी गई है। हमें अपनी दिनचर्या और खानपान के बल पर स्वयं को स्वस्थ रखने का प्रयास करना चाहिए। योग और आयुर्वेद आधारित जीवनशैली अपनाकर हम बिना किसी कठिनाई के निरोग रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने हमें शरीर रूपी मंदिर दिया है, जिसे हमें स्वस्थ रखने का प्रयास करना चाहिए। कोविड के दौर में आयुर्वेद की महिमा सबने देखी है। आयुर्वेद ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जो जीवनभर हमें निरोग रखती है।

आयुष विभाग के बजट में 16 गुना वृद्धि
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पहला आयुर्वेदिक भवन 1916 में ग्वालियर में बना। उसके बाद 1972 में तीन भवन जबलपुर, इंदौर और उज्जैन में बने। फिर बुरहानपुर और 1995 में भोपाल में पंडित खुलीलाल महाविद्यालय की स्थापना की गई। हमारी सरकार ने प्रदेश में 9 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय स्थापित करने की शुरुआत की है। राज्य सरकार ने वर्ष 2002-03 की तुलना में आयुष विभाग के बजट में 16 गुना वृद्धि की है। प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वेलनेस सेंटर खोले गए हैं। हम टूरिज्म के माध्यम से आयुष चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वर्ष 2014 में आयुष का बाजार लगभग 3 बिलियन डॉलर था, जो अब 43 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। भारत की गौरवशाली अतीत पश्चिमी देशों में पुन: प्रतिष्ठित हो रहा है। इसी वर्ष स्कॉटलैंड में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के महान ऋषि महर्षि चरक की प्रतिमा का अनावरण किया गया है।
भविष्य में आयुर्वेद का होगा अलग स्थान
उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति के भविष्य में आयुर्वेद का अपना अलग स्थान होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग और आयुर्वेद को जोड़कर स्वस्थ और समृद्ध भारत की संकल्पना की है। व्यक्ति स्वस्थ रहे, इसके लिए हमें अपने किचन पर भी ध्यान देना पड़ेगा। किचन में संतुलित आहार की वस्तुएं उपलब्ध हो, इस ओर हम जागरुकता लाने के लिए काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में लगातार मेडिकल और आयुर्वेदिक महाविद्यालयों की संख्या बढ़ रही है। प्रदेश में 2023 तक 7 आयुर्वेदिक और 2 होम्योपैथी व यूनानी पद्धति के महाविद्यालय थे। अभी 8 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालयों के निर्माण कार्य जारी है। एक और आयुर्वेदिक कॉलेज के लिए भारत सरकार से स्वीकृति मिली है। इस प्रकार से अब प्रदेश में आयुष विभाग के अंतर्गत तीनों चिकित्सा पद्धतियों के कुल 18 महाविद्यालय संचालित होंगे। प्रदेश में 1700 से अधिक आयुर्वेदिक औषधालय चल रहे हैं। यहां आम नागरिकों को योग सिखाने के लिए कक्षाएं प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल के इलाज के लिए भी आयुर्वेदिक दवाएं बांटी जा रही है। आयुष इंटर्न्स को मिलने वाले स्टाइपेंड को मेडिकल स्टूडेंट्स के जैसे ही बढ़ाने की आवश्यकता है।





























