बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में उप मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण, प्राकृतिक खेती और गोवंश सुविधाओं का लिया जायजा

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Deputy Chief Minister inspects Basaman Mama Bovine Wildlife Sanctuary; reviews natural farming and facilities for cattle.

​भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने आज बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का दौरा कर वहां संचालित की जा रही प्राकृतिक खेती और गौवंश के लिए विकसित की जा रही आधारभूत सुविधाओं का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गौवंश वन्य विहार परिसर में पूर्णतः प्राकृतिक रूप से उगाई गईं हरी सब्जियों और अन्य खाद्य सामग्रियों को भी देखा और उनकी गुणवत्ता की सराहना की।

​निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने उपस्थित किसान भाइयों और आमजनों से कहा कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में प्राकृतिक खेती का एक बेहतरीन और आदर्श मॉडल विकसित किया गया है। यहाँ कम जगह पर मल्टी-लेयर खेती की जा रही है, जिसमें सबसे नीचे हल्दी, अदरक और प्याज जैसी फसलें हैं, तो वहीं ऊपर लौकी, तोरई, कद्दू, करेला, खीरा, भिंडी और बैगन जैसी हरी सब्जियां सफलतापूर्वक उगाई जा रही हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि इस पूरी खेती में डीएपी और यूरिया जैसे केमिकल फर्टिलाइजर्स का उपयोग बिल्कुल शून्य है। यह पूरी तरह से विष-मुक्त खेती है। उन्होंने किसानों में फैली इस भ्रांति को दूर किया कि केवल रासायनिक खादों से ही ज्यादा उत्पादन संभव है। श्री शुक्ल ने कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है और आमदनी बढ़ती है, बल्कि इससे उत्पादित साग-सब्जियों के सेवन से हमारे परिवार का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है और बीमारियों की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि इस गौवंश वन्य विहार में लगभग नौ हजार बेसहारा गायों का संरक्षण और संवर्धन किया जा रहा है, जिससे पर्याप्त मात्रा में गोबर और गोमूत्र उपलब्ध होता है। इसी का उपयोग कर यहाँ बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक खाद एवं कीटनाशक तैयार किए जा रहे हैं। यहाँ गेहूं, धान, मूंग के साथ-साथ बड़े पैमाने पर बागवानी के तहत फलदार वृक्ष भी लगाए गए हैं।

​उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सभी किसान भाइयों से अपील करते हुए कहा कि वे बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का दौरा करें और यहाँ आकर सीखें कि किस प्रकार प्राकृतिक खेती के माध्यम से लागत को कम करके लाभदायक खेती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस पद्धति को अपनाकर हम न केवल अपनी जमीन की उर्वरा शक्ति को नष्ट होने से बचा सकते हैं, बल्कि रासायनिक खादों के आयात पर खर्च होने वाली देश की विदेशी मुद्रा की भी बड़ी बचत कर सकते हैं। अंत में उन्होंने पूरी लगन से इस कार्य में जुटे सभी कर्मचारियों और प्रबंधकों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।